भारत एक ऐसा देश है जो क्रिकेट और धर्म को लेकर थोड़ा ज्यादा ही प्रतिक्रियावादी देश है……किसी को भी अर्स से फर्स और फर्स से अर्स पर ले जाने की काबीलियत भारतीय जनमानस में कूट-कूट कर भरा है…..
अब हम आते है आपके प्रश्न की ओर-
"इसका सीधा सा उत्तर है सेमीफाइनल की हार के लिए धोनी बिल्कुल जिम्मेदार नही है"……यह मैच मात्र दो व्यक्तियों की वजह से हारी है टीम इंडिया……विराट कोहली व रवि शास्त्री……
चौकिये मत जो भी क्रिकेट की समझ रखते होंगे शायद मेरी बात को समझ सकेंगे…..
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यह मैच टीम इंडिया खराब खेलने की वजह से नही हारी है यह मैच खराब निर्णयों की वजह से हारी है…..जब आपके 5 रन पर 3 विकेट है तो हर कोई यही सोच रहा था यह मैच तो धोनी टाइप का हो गया भाई अब धोनी को आना चाहिए विकेट रोक कर रखने की जो शानदार काबिलियत है उनके पास……लेकिन आता कौन है "दिनेश कार्तिक" फिर 24 पर 4 हम सब सोच रहे थे भइया अब तो धोनी ही आएंगे लेकिन आया कौन "हार्दिक पांड्या" भारत लगभग मैच वहीं हार गया…..आप स्वयं सोचिये क्या कार्तिक व पंड्या के पास 40 ओवर वो भी प्रेशर में खेलने का टेम्परामेंट है?…….जवाब है "नही"…….ये सब स्लॉग ओवर व 20–20के प्लेयर है,,,,,अगर वही कार्तिक व पंड्या में से कोई भी अंतिम ओवरों में होता तो 5 गेंद पहले ही मैच जीत जाती टीम इंडिया…….और ऐसा नही है कि टीम इंडिया ने ऐसे मैच नही जीते है कई बार जीते है जैसे- ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका,पाकिस्तान, यहाँ तक कि इंग्लैंड व न्यूजीलैंड से भी जीती है लेकिन उस समय कप्तान MSD हुआ करते थे जो शानदार निर्णय लेने में माहिर है…….यहाँ तो एक ऐसा व्यक्ति कप्तान है….जो जज्बात में आकर निर्णय लिया करता है…..चापलूसी करना व करवाना पसन्द करता है…..तुनकमिजाजी है…..शुक्र है कि इस टीम में धोनी व रोहित शर्मा जैसा शानदार व्यक्तित्व,खिलाड़ी व कप्तान टीम में मौजूद है/था वरना क्या होता सबको पता है……कोहली की खराब निर्णयन क्षमता के कारण ही सितारों से भरी RCB की टीम कभी बेहतर नही कर पाती……..
भारत के महान इतिहासकार "रामचंद्र गुहा" व महान भूतपूर्व खिलाड़ी "अनिल कुंबले" भी कोहली के स्वभाव व निर्णयन क्षमता के बारे में बोल चुके है……..आज किसी खिलाड़ी की वजह से नही मात्र कोहली व उसका चापलूस कोच शास्त्री के निर्णय की वजह से "टीम इंडिया" हार गई……..
कबीरा खड़ा बाजार में, मांगे सबकी खैर ।
ना काहू से दोस्ती – ना ही किसीसे बैर ।। – कबीर
मैं न धोनी का प्रसंसक हूँ न ही कोहली का आलोचक……एक साहित्य का छात्र होने के कारण( स्वयं को रामचन्द्र शुक्ल जी के वंशज का हिस्सा जरूर मानता हूँ) तार्किकता व तटस्थता पूर्वक लिखा हूँ…….
तार्किक व सकारात्मक आलोचकों/समीक्षको के प्रतिक्रिया, भावो,विचारों को जानने की इच्छा रहेगी ….कृपया कॉमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें…….(हाँ एक बात जो बहुत जरूरी है….कृपया चाय की दुकान पर,किसी मित्र के रूम पर, या किसी विचारधारा से प्रभावित व्यक्ति से फिलहाल बहस न करें ये बहस कब लड़ाई -झगड़े में बदल जाएगी पता नही चलेगा……और दुःख या गुस्से में ऐसा कोई कार्य न करे जिससे बाद में पश्चाताप हो……खेल को खेल ही रहने दे…..जय हिंद)
(हम सभी भारतीय है हम सबकी भी देश के लिए कई जिम्मेदारियां है,न कि सिर्फ उन 11 की……)