ICC की कमाई का करीब 75 % हिस्सा भारतीय बाज़ार से आता है। साथ ही भारत के पड़ोसी देश भी भारत की देखा देखी ही क्रिकेट खेलते हैं। ICC को जो revenue क्रिकेट खेलने वाले देशों से प्राप्त होता है उसे वह अपने सभी सदस्यों में बांटता है। 75 % revenue भारत से, करीब 15 % इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया से तथा बाकी अन्य क्रिकेट खेलने वाले देशों से ICC को प्राप्त होता है।
इस revenue को सभी क्रिकेट खेलने वाले देशों में बांटा जाता है । इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जितना योगदान करते हैं करीब करीब उतना ही पाते हैं। भारत अपने योगदान का एक छोटा हिस्सा ही ICC से प्राप्त करता है। अन्य सभी देश ICC की झोली में योगदान तो नाममात्र का करते हैं पर एक बड़ी धनराशि ICC से प्राप्त करते हैं।
कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि ICC भारतीय क्रिकेट मार्केट से पैसा कमाता है, उसका एक छोटा अंश भारत को देता है और बाकी अन्य क्रिकेट खेलने वाले देशों को। उदाहरण के तौर पर श्री लंका ICC को शायद 20 मिलियन डॉलर भी कमा कर नहीं देता पर ICC से उसे करीब 127 मिलियन डॉलर प्राप्त होते है।
यह कह सकते हैं कि भारतीय मार्केट वह दुधारू गाय है जो सारे क्रिकेट जगत को पोषित कर रहा है। पाकिस्तान से भारत क्रिकेट नहीं खेल रहा है उसके बावजूद भारत के मार्केट से कमाया गया पैसा ICC के जरिये पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को पहुंच रहा है-करीब 127 million डॉलर जबकि खुद पाकिस्तान के मार्केट से ICC को इसका एक तिहाई भी नहीं मिलता है।
अगर भारत ने क्रिकेट में दिलचस्पी लेनी छोड़ दी तो ICC का revenue वर्तमान revenue का 20 % भी नहीं रहेगा क्योंकि ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के सिवा अन्य क्रिकेट खेलनेवाले देश अपने बल बूते पर अपने देश में क्रिकेट का ढंग से आयोजन करने लायक धनराशि को भी तरसेंगे।
क्रिकेट खेलने वाले कई प्रमुख देश रग्बी भी खेलते है। पर रग्बी विश्व कप का बजट क्रिकेट विश्व कप के बजट के मुकाबले कुछ नहीं है। क्यों ? क्योंकि भारत रग्बी नहीं खेलता। अगर भारत रग्बी में क्रिकेट जितनी दिलचस्पी लेता होता तो रग्बी विश्व कप का बजट भी क्रिकेट विश्व कप के बजट को टक्कर दे रहा होता।